मस्तियां, महिलाएं और लॉकडाउन….

जिंदगी भी कितनी अजीब है, सोचते कुछ हैं, हो कुछ जाता है बिल्कुल पानी में चलती नाव की तरह 😊,किस्से कहानियों का खेल है जिंदगी। ‘लॉक डाउन’ मैंने कहां सोचा था इस शब्द से सामना होगा मेरा, कल मम्मी से बात कर रही थीं, उन्होंने तक कह दिया, “बेटा ऐसे दिन भी आएंगे हमने नहीं सोचा था” वैसे अपनी मर्जी से चाहे कई कई दिन तक घर से ना निकलो, पर आजकल हर बात पर बाहर जाना याद आता है।‌ सबसे ज्यादा अखरता है दोस्तों से ना मिल पाना, जबकि व्हाट्स अप विडियो कॉल जैसी सुविधाओं के चलते गप्पें हांकने की सुविधा उपलब्ध हैं फिर भी, किट्टी पार्टी जैसी गॉसिप पर तो रोक लग ही गयी हैं। औरतों की जिंदगी का दायरा बड़ा छोटा होता है लेकिन फिर भी यदि उनकी मर्जी के विरुद्ध उन्हें बांध दिया जाए तो उनके लिए सजा समान है जिंदगी। खैर बात कर रही थी लॉक डाउन की, कोरोना जैसी महामारी के कारण ये आफत टूटी है सब पर । एक तो जान का खतरा, ऊपर से सरकार की लगाई पाबंदी वरना विश्वास मानिए हम महिलाएं सौ तरीके निकाल ही लेती इस आफत से निकलने का भी। मेरी अपनी सभी सखियों से बात होती है, किसी को कोई परेशानी नहीं है 😊पर यही सबसे बड़ी परेशानी है। सारा दिन घर में बंद, घर का सारा काम, आजकल कामवाली बाई की सुविधा भी बंद हैं, वैसे आदत पड़ चुकी है सबको धीरे धीरे काम करने की, लेकिन काम तो फिर काम ही है ना, वैसे हम व्यस्त हमेशा से थे, जब भी, जब लॉक डाउन नहीं था और अब भी हैं😊। जब लॉक डाउन नहीं था तो किटी पार्टी, खरीददारी, सखियों के जन्मदिवस उत्सव, महिला क्लब के कार्यक्रम और भी बहुत कुछ। और अब जब लॉकडाउन है तो…. सबको पता ही है मैं क्या बताऊं। खैर एक आवश्यक बात, कुछ चर्चा तो रह ही गयी – कोरोना पर चर्चा करना, चाहे कम जानकारी हो या अधूरी पर, चर्चा में बढ़-चढ़कर कर भाग लेना हम महिलाओं का जन्मसिद्ध अधिकार है। कल ही मेरी अपनी एक सखी से बात हो रही थी, ऐसी ऐसी बातें बताई मुझे कोरोना के बारे में , कि ऐसा लगा आजतक की सारी पढ़ाई लिखाई बेकार हो गयी। कितने केस हो गये अभी तक, कितने ठीक हो गये, कितने मरीज अस्पताल में हैं और तो और देश विदेश में कहां कहां तक कितना कोरोना का प्रभाव है सब पर चर्चा करतीं हैं हम सब महिलाएं। एक तो मीडिया का प्रभाव, ऊपर से सारा दिन इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी और रही सही कसर पूरी होती है फेसबुक और व्हाट्स एप पर फैले निराधार मैसेज। बात कोरोना चर्चा की हो रही थी, इतना गंभीर विषय भी आसानी से इस लॉकडाउन में चर्चित है हम महिलाओं के बीच क्यूंकि यही तो कारण है कैद का हमारी। आज हनुमान जयंती है, यदि सामान्य दिन होते, मेरा मतलब वही है, यदि लॉकडाउन ना होता तो आज उत्सवों की भरमार होती। कहीं भंडारे का, तो कहीं सुंदर काण्ड के पाठ के आयोजन चल रहे होते। सारे मंदिर भरे होते, सजे होते और गूंज रहे होते बजरंगबली की जय-जयकार से। पर इस लॉकडाउन ने समय को ही रोक दिया। शांत वातावरण में सिर्फ पक्षी चहचहा रहे हैं। महिलाओं को बेशक कुछ पाक-कला उत्कृष्ट करने का अवसर जरूर मिल रहा है जिसका फायदा संकटमोचन हनुमान जी को भी हुआ। घर में ही हलुए का भोग लगाकर पूजा प्रसाद बन गया। हमेशा महिलाओं की शिकायत, पतिदेव समय नहीं देते इस लॉकडाउन में वह भी दूर हो गयी क्योंकि आजकल पतिदेव जितना समय दे रहें हैं जीवन में कभी नहीं दिया होगा। अब जैसे ही लॉकडाउन का नाम होता ये चर्चा का विषय अवश्य होता है कि आदमी सारा दिन घर पर नहीं बैठ सकते और जैसे ही ये विषय छेड़ो भारतीय शेयर बाजार, अर्थव्यवस्था, प्रधानमंत्री मोदी के काम, मुख्यमंत्री केजरीवाल ने क्या किया, योगी आदित्यनाथ की चर्चा, महाराष्ट्र और तेलंगाना में सबसे ज्यादा कोरोना जैसे भारी विषयों पर चर्चाएं करती हैं हम महिलाएं। यही दिनचर्या है आजकल आसान सी लॉकडाउन के कठिन दिनों में । कोई किस्सा कहानी नहीं पर जिंदगी का अभिन्न हिस्सा है ये लॉकडाउन आजकल क्योंकि ये ही आधार है जीवन का आजकल, बहुत सारी भविष्य की योजनाएं हैं पर अटकी हैं ……… इसी के कारण, देखो क्या होता है, ये भी अभी अनिश्चित है और बेबस और बेचैन हैं हम महिलाएं अपनी अधूरी योजनाओं के साथ।

2 विचार “मस्तियां, महिलाएं और लॉकडाउन….&rdquo पर;

  1. Your blog is a true picture of the present day situation which has compelled the humans to lock themselves up in their houses to prevent spread of Covid-19 which of course is need of the hour for safety of everyone including ourselves. But this has given rise to certain hardships as well.
    You have drawn an excellent picture of what is happening and the compulsions arising out of it which is worth appreciation.
    Now coming to the blog. I put it in two main parts. Boat in the waters and imprisonment of our freedom. I take this opportunity to share my experiences in life along with conveying my appreciation of your efforts.
    • You have very well termed our lives being similar to the fate of a boat in the waters. No one knows which way the water may take our boat alias lives! Our whole life is like this boat sailing in waters and unsure about what is waiting for us the next moment. The waters (situations & circumstances) are the guiding force in our life, but as a sailor we have to be ready to meet any and every eventuality by training our minds in this direction so that we reach our destination inspite of obstructions.
    • Second point taken up by you is the gist of our behavioral system. You have rightly tried to differentiate between freedom and captivity!
    • By default, no living being wants anything to be forced upon, be it humans, animals and even plants 🌱 !!
    • Everyone wishes to grow in it’s natural ways. In this natural growing freedom, no one minds the restraints coming in the way and very conveniently find ways to take diversions to grow freely but if forced to do something against freedom, then one feels like a prisoner of circumstances and tries hard to take back the control of freedom of movement.
    • You have rightly said that by choice one can enjoy living indefinitely in isolation. But, if forced to do so , then our inner self boils up, creates a lot of turmoil within us and we want to break every wall in this pursuit !
    • Now, here comes training our minds so that we are able to silence the waters & sail our boat 🚣‍♂️ the desired way .
    • This ‘ desired-way ‘ is the crux of our troubles, miseries and sorrows and it is a long, long way to tell us that we must take the waters as it is and try to be perfect sailors in ignoring the rough waters and navigating our boat of life in the direction we have planned !!
    • This is a very complex matter of trying one’s mind to accept & sail through rough waters which shall be taken-up separately on some other occasion.
    • It is very correctly said that : ज़ोर ज़बरदस्ती से आप एक शेर को वश में कर सकते है परन्तु ज़ोर ज़बरदस्ती से एक कली को विकसित कर फूल नहीं बना सकते .
    • Well, you have done very well & excelled in expressing your views. I appreciate your efforts and wish you all success as an emerging Blogger✍️.
    • Wish you all the best along with my Blessings!!🙏 🙏

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