धारावाहिक कहानी ‘ धुंध’

प्रिय मित्रो मैं एक धारावाहिक लिख रहीं हूँ आप पढ़िये अपने सुझाव दीजिये आशा करती हूँ आपको पसंद आयेगा | ये पूर्णतया काल्पनिक है ( इन्दु तोमर )

महक ने ईशा को तैयार करके स्कूल भेजा और खुद भी अॉफिस के लिये निकल गयी| यही उसकी दैनिक दिनचर्या थी| दिन में आया ईशा को स्कूल से लाकर खाना खिलाकर सुला देती थी | शाम को छ: बजे जब महक घर लौटती तो माँ बेटी साथ कुछ खाते-पीते फिर ईशा का होमवर्क करना शुरू होता जो खतम होते – होते नौ बजा देता था | फिर ईशा को खाना खिलाना और कहानी सुनाकर रात दस बजे सुला देना |
ईशा के सोते ही महक की खुद से लड़ाई शुरू हो जाती थी | आँखों में नींद कम होती थी और आँसू ज्यादा | हर रात महक प्रयास को मैसेज करती थी ये जानते हुए भी कि वो ज़वाब नहीं देगा| कई बार फोन भी करती थी इस उम्मीद में कि आज शायद प्रयास उसका फोन उठायेगा तो वो पूछेगी उससे क्या कुसूर है उसका, क्यूँ विवाहित होते हुये भी वो पिछले आठ वर्षों से अकेली रहकर ईशा काे पाल रही है ? क्यूँ प्रयास ने उन्हे इस तरह छोड़ रखा है? पहले प्रयास कभी-कभी ईशा को फोन करता था बात करता था लेकिन अब सात महीने से वो भी नहीं करता| महक सरकारी नौकरी करती थी अच्छे पद पर अच्छी तनख्वाह थी उसकी तभी ईशा को शहर के प्रतिष्ठित पब्लिक स्कूल में पढ़ा रही थी | सरकार से फ्लैट मिला हुआ था ऱहने के लिये बस यही जीवन था महक का|
दस साल पहले जब महक के माता-पिता ने उसके लिये प्रयास के चुना था वो भी नहीं जानते थे उन्होने अपनी बेटी को अन्जाने में दुर्भाग्य का श्राप दे दिया | प्रयास अच्छी कद काठी का स्मार्ट लड़का था | नामी खानदान, अच्छी प्राईवेट नौकरी, छ: अंको में तनख्वाह देखकर महक के माता-पिता ऱीझ गये थे प्रयास पर और इतरा रहे थे महक के भाग्य पर | प्रयास के छोटे से परिवार में उसकी माँ, एक बहन जो विवाहित थी | महक ने माता-पिता की पसंद को जीवन माना| सास को माँ और ननद को छोटी बहन समझा | धूमधाम से शादी हुई, महक के पिता ने अपनी हैसियत से ज्यादा खर्च करके बेटी को विदा किया था |
शादी के बाद तीन महीने बहुत सुखद बीते |महक को लगा वो स्वर्ग में आ गयी | दीवानों की तरह प्यार करने वाला पति, माँ जैसी सास सब सुखद था | महक ने अपनी शादी पर अॉफिस से तीन महीने की छुट्टी ली थी | जब छुट्टी खतम हो गयीं तो उसने प्रयास को बताया वो दो दिन के बाद जॉइन करेगी | प्रयास ने कोई उत्तर नहीं दिया और अपनी माँ के पास चला गया | थोड़ी देर बाद महक की सास निशा आयी बेटे के साथ और महक को फरमान की तरह कह दिया नौकरी छोड़ दो घर सम्हालो वंश आगे बढ़ाने की तैयारी करो | महक ने आराम से बात सुनी, सोचा और प्यार से कहा वो नौकरी करना चाहती है उसकी नौकरी उसके पतिधर्म या बहुधर्म में बाधा नहीं होगी | प्रयास ने भी उसकी बात का समर्थन किया | निशा चुप हो गयी पर उसके चेहरे के हावभाव ने साफ कर दिया कि उसे महक की साफगोई पसंद नहीं आयी और प्रयास के उसका साथ देने से तो निशा का माथा ही ठनक गया | गुस्से मे निशा अपने कमरे में चली गयी |प्रयास अपनी माँ का गुस्सा देखकर असहज हो गया और महक तो समझाने लगा कि उसके पापा के मरने के बाद प्रयास और उसकी बहन तो उनकी माँ ने अपने दम पर पाला-पोसा है, पढ़ा-लिखाकर लायक बनाया है | घर में हमेशा माँ की चलती है | महक परिस्थिति समझकर चुप हो गयी |दो दिन निशा शांत रही और मौका तलाशती रही कैसे महक के नौकरी पर जाने से रोके | निशा ने प्रयास से साफ-साफ कह दिया कि महक की नौकरी छुड़वा दे | प्रयास ऐसा नहीं चाहता था पर फिर माँ को कुछ नहीं कह सकता था | उसने महक को बहुत प्यार से समझाया पहले, जब महक नहीं मानी तो जबरदस्ती की परिणाम लड़ाई-झगड़ा हुआ | पहले ये लड़ाई सिर्फ बैडरूम तक थी फिर ड्रांइंग रूम तक आ गयी | महक ने दोनों माँ बेटे को साफ -साफ कह दिया वो कभी नौकरी नहीं छोड़ेगी चाहे कुछ भी हो जाये | महक के कड़े तेवर देखकर प्रयास और निशा चुप हो गये |

दो दिन बाद महक अलीगढ़ नौकरी पर चली गयी | पाँच दिन बाद आयी प्रयास नार्मल हो गया था पर निशा के तेवर वैसे ही थे | महक ने सोचा समय के साथ सब ठीक हो जायेगा | प्रयासजब माँ के सामने होता तो महक से काम से काम रखता पर जब निशा नहीं होती तो बहुत अच्छा पति बनकर रहता था | महक ससुराल के ढंग से खुद को ढालने की कोशिश कर रही थी |
एक दिन जब महक जब अपने ऑफिस में थी उसे बहुत जोर का चक्कर आया | उसने प्रयास को फोन करके बताया | प्रयास एकदम घबरा गया और गाड़ी लेकर महक को अलीगढ़ लेने आ गया | डॉक्टर ने बताया महक गर्भवती है तो प्रयास की खुशी का ठिकाना ना रहा| निशा भी बहुत खुश हुई उसने महक को बहुत सारे निर्देश जारी कर दिये| ये नहीं खाना, ये नहीं पीना, ऐसे सोना, वैसे जागना आदि आदि|महक जब अलीगढ़ जाती तो हर बार सोमवार सुबह प्रयास छोड़ने जाता था और शुक्रवार की शाम को लेने जाता था | नियमित डॉक्टर से चैकअप कराने ले जाता था | महक का पूरा ध्यान रखता था | कब सात महीने बीत गये महक को पता भी नहीं चला | महक को ऑफिस से छह महीने की मैटरनिटी लीव मिल गयी थी | दिनचर्या के काम में महक और निशा मिलकर करते थे प्रयास ने महक की देखरेख के लिये एक नौकरानी भी रख दी थी |

सही समय पर निशा ने एक प्यारी सी बिटिया के जन्म दिया | घर में सब बहुत खुश हुए | प्रयास के तो खुशी के मारे पांव जमीन पर नहीं थे | बेटी का नाम ईशा रखा गया | घर में सभी जरूरी नेग टेले हुए | निशा ने घर में बहुत बड़ी पूजा रखवायी | सारे रिश्तेदारों को बुलाया गया , खूब लेन देन हुआ | प्रयास ने महक से पचास हज़ार रूपये माँगे | ये कहकर कि इस समय बैंक से निकालने का समय नहीं है कल वापिस कर देगा |महक ने दे दिये | पूजा धूमधाम से सम्पन्न हुई | प्रयास ने अपनी बहन को पचास बज़ार रूपये शगुन में दिये | निशा बहुत खुश थी | एक सप्ताह बाद महक ने प्रयास से पैसे वापिस माँगे तो प्रयास ने टका सा जवाब दिया ” वो मैंने अपनी बहन को देने के लिये लिये थे उसे दे दिये और उसे शगुन देना हमारा फर्ज़ था |” महक को बहुत हैरानी हुई प्रयास ने उससे झूठ बोलकर पैसे क्यूँ लिये ? उसने प्रयास से कहा भी इतने सारे पैसे शगुन में देने की क्या जरूरत थी और यदि देने भी थे तो वह खुद देता या माँ देतीं लेकिन प्रयास ने उसे यह कहकर चुप कर दिया पैसे चाहे प्रयास कमाये या महक घर में जरूरत होगी तो खर्च करने ही पड़ेंगे | प्रयास और महक अपने बैडरूम में ये बात कर रहे थे अचानक तीर की तरह गुस्से में निशा उनके बैडरूम में घुसी और प्रयास से बोली “बहन को पचास हज़ार रूपये देने नें तेरी बीवी की जान निकल गयी, कल में मर जाऊँगी तो तुम दोनों तो मेरी बेटी से नाता ही तोड़ लोगे और अभी मैं जिंदा हूँ जो मेरे मन में आयेगा बेटी को दूंगी |” महक को निशा का ये नया रूप देखकर बहुत हैरानी हुई | उसने फिर भी बहुत धैर्य रखा और बोली- ” माँ आपको इतना बुरा लगा मेरा कहना तो आप मुझे मेरेे पैसे वापिस कर दो, आपकी बेटी है आपको जो देना है दो मैं नहीं रोकूंगी, प्रयास ने मुझसे झूठ बोलकर पैसे लिये थे |” निशा गुस्से में तमक कर बोली “महारानी जी नौकरी करनी है तो पैसे घर में दो, नहीं तो घर बैठो घर का काम करो |” प्रयास चुपचाप सुन रहा था | महक को लगा वो बीच बचाव करेगा अपनी माँ से कहेगा जब हम पति-पत्नि आपस में बात कर रहे थे तो निशा क्यूँ बीच नें आयी उन्हे बैडरूम के बाहर खड़े होकर बातें नहीं सुननी चाहिये | पर ऐसा कुछ नहीं हुअा उल्टे निशा ने रोना पीटना मचा दिया और प्रयास को इमोशनल ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया कि पत्नी के आते ही माँ के साथ दुर्व्यवहार कर रहा है वो, आज उसके पिता जिंदा होते तो वो अकेली नहीं पड़ती, इस दिन के लिये उसने प्रयास को पाल-पोसकर बड़ा किया था, महक पर उसका कोई कंट्रोल नहीं है |
निशा को यूँ देखकर प्रयास ने एकदम रंग बदला और महक को दो चाँटे जड़ दिये खूब गाली गलौंच की | ये सब देखकर निशा कुटिल मुस्कराहट के साथ महक को देखती हुई प्रयास को वहाँ से ले गयी और उस रात प्रयास अपनी माँ के बैडरूम में ही सोया |
महक बहुत देर तक रोती रही और सोचती रही उसकी क्या गलती थी , निशा ने क्यूँ उसके साथ ऐसा व्यवहार किया ? प्रयास ने क्यूँ उसका साथ नहीं दिया | महक के माता-पिता और उसने स्वयं भी शादी से पहले ही बता दिया था कि वह नौकरी करेगी | जिस पर प्रयास और उसकी माँ को कोई परेशानी नहीं थी | अब ऐसा क्या हो गया ?
आज के प्रयास के व्यवहार से आहत महक बिल्कुल उदास हो गयी थी | सुबह वह अपने कमरे से बाहर नहीं निकली | प्रयास आया बिना उसकी ओर देखे ईशा को बाहर अपनी माँ को दे दिया | दोनों माँ बेटे खा पीकर तैयार होकर कहीं चले गये | महक चुपचाप अपने कमरे में पड़ी रही | दोपहर हो गयी महक ने उठकर ईशा को नहलाया खुद तैयार हुई | अपने माता पिता से फोन पर बात की | चार बजे दोनों माँ बेटे घर लौटे तो उनके साथ प्रयास की नानी भी थीं | महक ने उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया | नानी उसके बैडरूम में आकर महक को समझाने लगीं कि घर की बातें बाहर मत करना, उनकी बेटी ने बड़े दुख देखे हैं इसलिये थोड़ी सख्त हो गयी है | महक बिना कुछ बोले चुपचाप सुनती रही | नानी बाहर आकर अपनी बेटी नाती से बहुत देर मंत्रणा करती रहीं | प्रयास देर रात 12 बजे बैडरूम में आया और महक से बोला “इस घर में वही होगा जो उसकी माँ चाहती हैं या तो महक नौकरी थोड़कर घर सम्हाले उसकी माँ की सेवा करे या फिर अपनी पूरी तनख्वाह उसकी माँ को दे |” महक ने प्रयास की धमकी भरी बात ध्यान से सुनी और प्रयास को दृढ़ निश्चय से अपना फैसला सुना दिया कि ना तो महक नौकरी छोड़ेगी और ना ही अपनी तनख्वाह से एक पाई भी प्रयास या उसकी माँ को देगी | प्रयास उसे ब्याहकर लाया है इसलिये घर चलाने की जिम्मेदारी उसकी है | प्रयास ने उससे कुछ देर बहस की पर महक ने उसकी हर बात का जंवाब देकर साफ कर दिया कि वो अपने इरादे पर अटल है प्रयास और उसकी माँ की जबरदस्ती वो नहीं सहेगी |
प्रयास चुप हो गया | सुबह महक ईशा को लेकर अलीगढ. आ गयी | निशा ने प्रयास से लड़ कर जोर जबरदस्ती से महक के पास जाना बंद करवा दिया | महक भी पहले हर हफ्ते आती थी अब पंद्रह दिन में आती थी पर माँ बेटे का व्यवहार उसके प्रति बहुत रूखा था| प्रयास तो सोता भी अपनी माँ के कमरे में था | महक अपना भी खाना पीना खुद बनाती थी | यहाँ आकर भी उसके साथ दोनों माँ बेटे का बहुत बुरा बर्ताव था | निशा कई बार बेटी के घर रहने जाती थी | तब प्रयास महक के पास आता तो उसे और ईशा से बहुत प्यार करता था | पर जैसे ही निशा का फोन आता तो माहौल बदल जाता था | महक बहुत परेशान और दुखी रहती थी पर एक अच्छी माँ बनकर बेटी के पालन पोषण में कोई कमी नहीं करती थी | प्रयास का ट्रांसफर मुम्बई हो गया था | वह महक से मिलने आया और बोला वह निशा को अपने पास रख ले या नौकरी छोड़कर निशा के पास रहे| उसकी माँ चाहती कि उसकी पोती उसके पास रहे | महक ने कहा वह नौकरी नहीं छोड़ सकती प्रयास की माँ चाहे तो उसके साथ रह सकती है लेकिन इस शर्त पर कि हर पंद्रह दिन में प्रयास को उसके पास आना पड़ेगा और अपनी माँ का खर्चा उठाना पड़ेगा | प्रयास राजी़ हो गया | चार पांच दिन शांति से निकले ही थे कि निशा ने ईशा की आया से झगड़कर उसे निकाल दिया जिससे महक घर मे काम करे | महक को बहुत गुस्सा आया उसने आया को प्यार से समझा बुझाकर वापिस बुलाया और सास को समझाया कि जैसा उसका घर चल रहा था चलने दे खुद भी शांति से रहे और उसे भी रहने दे |
पर निशा अपने रवैये पर अड़ियल रही | महक के बार बार समझाने पर भी निशा पर कोई असर नहीं पड़ा | कभी कभी जब प्रयास का फोन आता था तो निशा फोन लेकर बैठ जाती और महक को बात नहीं करने देती थी प्रयास के महक के खिलाफ कान भरती जिसकी वजह से महक और प्रयास के रिश्ते में दूरी और कड़वाहट आ रही थी | महक की बार बार कोशिश के बावज़ूद भी उसका परिवार और दिल टूट रहा था जिसका कारण सिर्फ निशा उसकी सास थी और प्रयास की अपनी माँ की ओर अँधभक्ति थी | इस बार जब प्रयास अलीगढ़ आया तो महक ने उससे बात करने की कोशिश की तब निशा ने वो नाटक दिखाये कि प्रयास ने फिर से महक से मारपीट की इतना भी नहीं सोचा कि छोटी सी ईशा पर इसका क्या असर होगा | निशा अपने कुचक्र के सफल होने पर वह खुश थी | प्रयास अपनी माँ को अपने साथ मुम्बई ले आया | निशा यही चाहती थी कि प्रयास महक से दूर जाये वही हो रहा था |
एक महीने से निशा मुम्बई मे थी | प्रयास की बहन के बच्चों की छुट्टियाँ हो गयीं थी वह भी अपनी माँ और भाई के पास घूमने मुम्बई आ गयी थी | सजा सिर्फ महक भुगत रही थी किस गुनाह की ये वो भी नहीं जानती थी |
महक बार बार प्रयास से बात करके अपने सम्बंधो को सामान्य करने की कोशिश करती थी पर प्रयास सिर्फ अपनी माँ की जुबान बोलता था | साल बीत गया इस बीच केवल तीन बार प्रयास महक से मिला वो भी मज़बूरी में | प्रयास महक को कभी फोन भी नहीं करता था |
इस बार जब महक ने फोन किया तो प्रयास का व्यवहार बिल्कुल बदला हुआ था | उसने महक का फोन उठाया और बोला अब उनके रिश्ते मे कुछ नहीं बचा है बेहतर होगा महक उसे तलाक दे दे, महक को अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ उसे प्रयास से ये उम्मीद बिल्कुल नहीं थी | उसने खुद को सम्हाला और प्रयास से बोली वो उसे कभी तलाक नहीं देगी | प्रयास जो चाहे कर ले, वो इस तरह से ईशा और अपनी जिंदगी बरबाद नहीं करने देगी |फोन कट गया, महक बहुत रोयी अपने दुर्भाग्य पर | तभी फिर से फोन बजा महक को लगा प्रयास होगा शायद उसे अपनी भूल महसूस हुई होगी पर फोन महक के मायके से था, महक की माँ का आकस्मिक निधन हो गया था | अचानक महक की आँखों के सामने अँधेरा छा गया सहारा लेकर कुर्सी पर बैठ गयी | सोच रही थी अपने माता पिता से अपनी मुसीबत की चर्चा करेगी पर दुख बाँटने वाली माँ ही नहीं रही | सुबह महक ने निशा को फोन किया और अपनी माँ की मृत्यू की जानकारी दी निशा ने बेऱुखी से जवाब दिया “ये तो होना ही था, तू जैसा करेगी, वैसा भरेगी”| निशा बिल्कुल टूट गयी थी | दुनिया दिखावे के लिये माँ बेटे शोक प्रकट करने तो आये पर महक से बात तक नहीं की | निशा ने जाते समय ईशा को अपने साथ मुम्बई ले जाने को कहा तो महक का सब्र का बाँध टूट गया, उसने निशा से कहा कि क्यों वह प्रयास और उसका सम्बन्ध तोड़ना चाहती है ? क्या बिगाड़ा है ईशा और महक वे उसका ? क्यों वो प्रयास और उसके बीच में आ रही है ? निशा पर महक की किसी बात का कोई असर नहीं पड़ा | प्रयास भी निष्ठुर की तरह सब देख रहा था |
ईशा के खांसने की आवाज़ से महक अतीत से वर्तमान में आ गयी |
जल्दी से ईशा के पास गयी उसे पानी पिलाकर प्यार से सुला दिया |

फिर खो गयी ईशा, सात महीने पहले जब प्रयास की बहन वे उसे फोन करके धमकी दी थी या तो महक उसके भाई को आपसी समझौते के तहत आराम से तलाक दे दे वरना प्रयास उसे बिना बताये दोबारा शादी कर लेगा | महक ने शांति से धमकी सुनी और फोन पर प्रयास से बात की और उसे साफ साफ शब्दों में बता दिया कि महक उसे कभी तलाक नहीं देगी वो जो चाहे कर ले पहले कदम प्रयास उठाये फिर वह जवाब देगी |

समय के साथ महक ने तीन बार पदोन्नति के लिये परीक्षा दीं, जिनमें उसे सफलती मिली |
इन्ही हालातों में जीवन के चार बसंत बीत गये| प्रयास ने महक से लगभग ना के बराबर नाता रखा हुआ है | ईशा का स्कूल में दाखिला कराना था हमेशा की तरह महक ने प्रयास को फोन किया पर उसने नहीं उठाया | कई बार कोशिश करने के बाद महक ने मैसेज भेज दिया “ईशा का दाखिला कराना है अलीगढ़ आना पड़ेगा माता पिता दोनों का होना जरूरी है |”
अगले दिन ज़वाब आया ” मैं नहीं आ सकता ईशा का दाखिला दिल्ली में करवायेंगे तुम नौकरी छोड़कर दिल्ली आ जाओ वरना जो करना है करो मुझसे कोई उम्मीद मत रखना | “
प्रयास से ऐसे उत्तर की उम्मीद नहीं थी महक को, वो सोच भी नहीं सकती थी प्रयास बुरा पति तो था ही अब बुरा पिता भी सिद्ध हो गया |
सोच का कोई अंत नहीं था | महक का जीवन त्रिशंकु की तरह था जिसका कोई छोर नहीं मिल रहा था | उसके गम में महक की माँ की असमय मृत्यु हो गयी थी | पिता अकेले बुढ़ापे मे दुखी रहते थे | महक वे बहुत कोशिश की वह निशा को समझा सके पर ऩिशा हर बार ये सिद्ध करती थी कि औरत ही औरत की दुश्मन होती है | पता नहीं निशा को क्या चिढ़ थी महक से | जैसे वो मन में ठान चुकी थी कि वो प्रयास और महक को अलग करवा के रहेगी |
महक के जो भी शुभचिंतक थे | उसे समझाते थे वो प्रयास और निशा के खिलाफ महिला अपराध निरोधक थाने में रिपोर्ट करे पर महक ने ऐसा कुछ नहीं किया | वो बार बार अपने स्वाभिमान को ताक पर रख कर सिर्फ प्रयास से बात करके उसे समझाने की कोशिश करती थी पर सब बेकार था | ईशा बड़ी हो रही थी और महक ने परिस्थितियों को भागय मान कर अपना पूरा ध्यान सिर्फ ईशा के पालन पोषण मे लगा दिया था| पर समय चक्र है जो घूमता ही है और समय की गाज़ किस पर गिर जाये किसी को नहीं पता |
एक दिन सुबह पाँच बचे महक का फोन बजा नींद मे महक ने फोन देखा तो प्रयास का नम्बर स्क्रीन पर फ्लैश हो रहा था, फोन उठाया तो प्रयास की बहन दूसरी तरफ थी, उसने बताया प्रयास का एक्सीडेंट हो गया था एक हफ्ता पहले | महक घबरा गयी थी उसना सारा हाल जाना तो पता चला प्रयास की नौकरी छूट गयी थी, वह अस्पताल में था, उसका अॉपरेशन होना था, अस्पताल का बिल दे लाख हो चुका था और अॉपरेशन में और दो लाख रुपये लगने थे | सारी जमा पूंजी खर्च हो चुकी थी | इसलिये महक की याद आयी |
महक ने सामान बाँधा ईशा को लेकर दिल्ली की ट्रेन पकड़ी | वहाँ जाकर अस्पताल पहुँची तो निशा से सामना हुआ वह एक-दो रिश्तेदारों के साथ थी | महक को देखकर निशा के चेहरे ने कई रंग बदले| नाटक करती हुई रोना शुरू कर दिया और बोली,”सम्हालो अपने पति को बेचारा पत्नी और बेटी के गम में बहुत दुखी रहता था पता नहीं क्या सोच रहा था कि दुर्घटना हो गयी | बहू के कितनी बार कहा साथ रहो अपनी गृहस्थी सम्हालो | ” महक जानती थी निशा कभी नहीं बदल सकती ऱिश्तेदारों के सामने ये ढोंग चल रहा था |
महक प्रयास के पास गयी | प्रयास ने ऩिशा को देखा तो शर्मिंदा हो गया, नज़र मिलाने की हिम्मत नहीं थी | महक ने प्यार से उसका हालचाल पूछा | डाक्टर से मिली अगले दिन ही प्रयास की अॉपरेशन की तारीख ली | हर तरह से सारा इंतज़ाम अपने हाथ में लेकर पंद्रह दिन मे प्रयास काफी ठीक हो गया था | निशा आती थी पर महक महसूस करती थी माँ बेटे के बीच अजीब सा खिंचाव था | प्रयास निशा से नाराज सा था | महक प्रयास के कमरे के बाहर डॉक्टर से उसके डिस्चार्ज के बारे मे बात करने गयी थी जब लौटी तो अंदर से प्रयास और उसकी बहन की जोर जोर से आवाज़ सुनी, प्रयास कह रहा था कि तुम दोनों माँ बेटी ने मेरा परिवार तबाह कर दिया, नैं महक के खिलाफ एक शब्द भी नहीं सुन सकता | अब मैं जो भी करूंगा उसकी सलाह से करूंगा, बहुत बेटा बन लिया अब पति और पिता का फर्ज निभाउँगा |” बहन तमतमा कर बाहर निकली तो महक सामने थी उसे देखकर चुपचाप चली गयी | महक अंदर आयी तो प्रयास की आँखे नम थीं, महक को देखकर बहने
लगीं | महक ने प्रयास का हाथ पकड़ कर उसे समझाया अब धुंध छंट गयी है | जीवन के नये सवेरे के बारे में सोचेंगे | जो हुआ बुरा था पर उसे भूलकर आगे बढ़ने में ही समझदारी है | प्रयास के महक के प्रति प्रेम और निष्ठा के आगे निशा की एक ना चली | अब उसने चुप रहना ही बेहतर
समझा | प्रयास ने ठीक होने पर फिर से पहले वाली
कम्पनी जॉइन कर ली | निशा ईशा को और घर सम्हालती थी | सब ठीक हो गया | महक की सहनशीलता और समझदारी से आज उसका घर और स्वाभिमान दोनों पर से अवसाद की धुंध छंट गयी |

2 विचार “धारावाहिक कहानी ‘ धुंध’&rdquo पर;

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